आज सुबह प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि - 'पाँच तारीख नौ बजे नौ मिनट तक सभी लोग अपने घरों में दीपक/मोमबत्ती/टॉर्च या मोबाईल की फ्लैश लाइट्स जलाकर कोरोना के संकट को प्रकाश का परिचय कराना है और जिसका एक मात्र उद्देश्य यह है कि हम सब एक ही मकसद से लड़ रहे हैं यह उजागर हो जाए'|
मैंने आजतक इस महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस तिथि (एकादशी अथवा द्वादशी जो भी तिथि पंचाग के अनुसार उस दिन पड़ रही हो) का इतना महत्त्व नहीं सुना है जितना कि अबकी बार सुन रहा हूँ | इसके बारे में अनेकों तर्क दिए जा रहे हैं जिनका विशेष कोई औचित्य नहीं है| यह बात मैं अपने मन से नहीं कर रहा हूँ| जब मैंने इतनी सारी पोस्ट पड़ी तो सोचा किसी ज्योतिषी से बात करके पूछ लेता हूँ कि क्या सही में पाँच अप्रेल को आने वाली तिथि में कुछ विशेष है या नहीं? उत्तर मिला ऐसा कुछ भी विशेष नहीं है जिससे कि इसे विशेष कहा जा सके|
नीचे मैं अब कुछ तर्क लिख रहा हूँ जो कि संस्कृत के विद्वानों/अध्यापकों/ छात्रों ने भी पोस्ट किए हैं| इनमें वो ज्योतिषी भी शामिल हैं जिन्होंने परम्परा से अथवा संस्कृत विश्वविद्यालयों से ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन न करके केवल 6 महीने अथवा 1 साल का कोई डिप्लोमा कोर्स किया है और अब ये ज्यादा बड़े तथाकथित ज्योतिषी बने हुए हैं | पाँच तारीख को नौ बजकर नौ मिनट तक इस क्रिया को करने से क्या क्या लाभ हैं, जो उन्होंने कहा है अथवा लिखा है उसी शब्दावली का प्रयोग कर रहा हूँ-
१. 9 नम्बर मंगल का है इसलिए - नौ बजकर नौ मिनट पर ये कार्य करना है, इससे आपका मंगल स्ट्रोंग होगा, इससे आपकी व्हील पावर बढेगी| ये आपकी इम्युनिटी को भी बढाएगा|
२. 5 तारीख़ का यह महत्त्व है कि - सिंह राशि है पाँचवीं, सिंह राशि अर्थात सूर्य की राशि |और यदि हम दीपक जलाएँगे तो सूर्य को ताकत मिलेगी, सूर्य को ताकत मिलेगी तो उसका प्रकाश चन्द्रमा तक जाएगा उससे चन्द्रमा को भी बल मिलेगा, इत्यादि........|
3. मोमबत्ती में ज्वार के दाने डालें जिससे राहु का इम्पेक्ट कम होगा|
4. इस दिन मेघनाद का वध किया था|
5. कालसर्प योग, तंत्र, इत्यादि कई उदाहरण|
सभी संस्कृत/संस्कृति प्रेमियों से निवेदन है कि जिस भी दल का आप समर्थन करते हैं उसे करें, लेकिन उसे पुष्ट करने के लिए फालतू में ऐसे किसी भी क्रियाकलाप से बचें जिसमें कि हमारे पूर्वजों द्वारा सुरक्षित परम्परा पर आघात पहुँचे | कोई सामान्य व्यक्ति यह सब करे तो समझ भी आता है लेकिन परम्परागत रूप से पढ़े हुए भी ऐसा करेंगे तो हम उस 'खूबसूरती' से लोगों को कभी महसूस नहीं करवा पाएँगे जो इस सनातन धर्म की है|
डॉ. कल्पेश बहुगुणा
इस वक्तव्य में उन्होंने किसी भी प्रकार से धार्मिक विचारों को नहीं जोड़ा|
देश में इसके पक्ष और विपक्ष में बोलने वालों के दो धड़े बने और सोशल मीडिया पर अपने-अपने विचार रखने लगे, जो कि किसी भी लोकतान्त्रिक देश के लिए बहुत आवश्यक भी है|
सुबह से ही लोग इस सम्बन्ध में व्हट्सअप, फेसबुक और ट्विटर पर पोस्ट कर रहे थे तो मेरा ध्यान अचानक संस्कृत विद्वानों/अध्यापकों/छात्रों की कुछ पोस्टों और स्टेटस पर गया, तो उनको पढ़कर बहुत ज्यादा ख़ुशी नहीं हुई और मन खिन्न सा ही रहा |
हम किसी का भी समर्थन करते हों उसके लिए अपनी प्राचीन परम्परा को दाँव पर नहीं लगाना चाहिए ऐसा मेरा मानना है| किसी को भी पूर्ण अधिकार है कि वह जिस दल को चाहता हो उस दल की छोटी से छोटी बात के लिए उस बात का समर्थन करे, भले ही वह सही हो अथवा गलत|
मैंने आजतक इस महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस तिथि (एकादशी अथवा द्वादशी जो भी तिथि पंचाग के अनुसार उस दिन पड़ रही हो) का इतना महत्त्व नहीं सुना है जितना कि अबकी बार सुन रहा हूँ | इसके बारे में अनेकों तर्क दिए जा रहे हैं जिनका विशेष कोई औचित्य नहीं है| यह बात मैं अपने मन से नहीं कर रहा हूँ| जब मैंने इतनी सारी पोस्ट पड़ी तो सोचा किसी ज्योतिषी से बात करके पूछ लेता हूँ कि क्या सही में पाँच अप्रेल को आने वाली तिथि में कुछ विशेष है या नहीं? उत्तर मिला ऐसा कुछ भी विशेष नहीं है जिससे कि इसे विशेष कहा जा सके|
नीचे मैं अब कुछ तर्क लिख रहा हूँ जो कि संस्कृत के विद्वानों/अध्यापकों/ छात्रों ने भी पोस्ट किए हैं| इनमें वो ज्योतिषी भी शामिल हैं जिन्होंने परम्परा से अथवा संस्कृत विश्वविद्यालयों से ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन न करके केवल 6 महीने अथवा 1 साल का कोई डिप्लोमा कोर्स किया है और अब ये ज्यादा बड़े तथाकथित ज्योतिषी बने हुए हैं | पाँच तारीख को नौ बजकर नौ मिनट तक इस क्रिया को करने से क्या क्या लाभ हैं, जो उन्होंने कहा है अथवा लिखा है उसी शब्दावली का प्रयोग कर रहा हूँ-
१. 9 नम्बर मंगल का है इसलिए - नौ बजकर नौ मिनट पर ये कार्य करना है, इससे आपका मंगल स्ट्रोंग होगा, इससे आपकी व्हील पावर बढेगी| ये आपकी इम्युनिटी को भी बढाएगा|
२. 5 तारीख़ का यह महत्त्व है कि - सिंह राशि है पाँचवीं, सिंह राशि अर्थात सूर्य की राशि |और यदि हम दीपक जलाएँगे तो सूर्य को ताकत मिलेगी, सूर्य को ताकत मिलेगी तो उसका प्रकाश चन्द्रमा तक जाएगा उससे चन्द्रमा को भी बल मिलेगा, इत्यादि........|
3. मोमबत्ती में ज्वार के दाने डालें जिससे राहु का इम्पेक्ट कम होगा|
4. इस दिन मेघनाद का वध किया था|
5. कालसर्प योग, तंत्र, इत्यादि कई उदाहरण|
सभी संस्कृत/संस्कृति प्रेमियों से निवेदन है कि जिस भी दल का आप समर्थन करते हैं उसे करें, लेकिन उसे पुष्ट करने के लिए फालतू में ऐसे किसी भी क्रियाकलाप से बचें जिसमें कि हमारे पूर्वजों द्वारा सुरक्षित परम्परा पर आघात पहुँचे | कोई सामान्य व्यक्ति यह सब करे तो समझ भी आता है लेकिन परम्परागत रूप से पढ़े हुए भी ऐसा करेंगे तो हम उस 'खूबसूरती' से लोगों को कभी महसूस नहीं करवा पाएँगे जो इस सनातन धर्म की है|
डॉ. कल्पेश बहुगुणा
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